Sunday, 5 May 2013

पुत्र मोह



आज एक पुत्र प्रेमी मनुष्य से मिलाप हुआ...श्री मान ने कहा के आप के कोई पुत्र नहीं है तो आप का वंश आगे कौन चलाएगा आखिर वंश को चलाने के लिए एक पुत्र की आवश्यकता तो होती ही है...उन् की इस मानसिकता पर अनायास ही हंसी छुट गयी...मैंने पूछा; क्यूँ भाई साहब क्या मेरी बेटी मेरा वंश आगे नहीं चला सकती और आप से किसने कहा के वंश सिर्फ पुत्र ही चला सकता है???वो मेरी इस बात को सुनकर मुस्कुराते हुए बोले; भाई लड़कियों के नाम पर भी कभी वंश चलता है क्या??? वंश को तो केवल पुत्र के नाम पर ही आगे बढ़ सकता है....
इस बात पर मैंने उन् से पूछा;
क्या आप मुझे "माता सीता'' के भाई का नाम बता सकते है???
क्या आप मुझे "मीरा बाई'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''महारानी लक्ष्मीबाई'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''रानी अवन्ती बाई'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''वीरांगना बेगम हजरत महल'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''सरोजनी देवी नायडू'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''सुचेता क्रपलानी'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''अरुणा आसिफ अली'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''विजय लक्ष्मी पंडित'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''पन्ना धाई'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''श्री मति इंदिरा गांधी'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''कल्पना चावला'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''श्री मति किरण बेदी'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''मेरिकोम'' के भाई नाम बता सकते हैं???
क्या आप मुझे ''सायेना नेहवाल'' के भाई का नाम बता सकते हैं???
और अगर आप इन् सब के भाइयों का नाम नहीं बता सकते तो ये मान लीजिये के ये सभी महिलाएं ही अपने पिता का वंश आगे बढ़ा रही हैं...
तो क्या अब भी आप को लगता है के पिता का वंश केवल पुत्र ही आगे बढाता है???

पी.एस.

टोपी का विवाद



कुछ राजनितिक सदबुद्धि-जीवियों को अपूर्ण खेद है के २८ अप्रेल को अरविंद जी ने जो टोपी पहनी उस पर उर्दू में लिखा था “मैं हूँ आम आदमी”
भारत कि किसी भी भाषा में लिखकर देख लीजिये! अर्थ केवल एक ही निकलेगा ‘’आम आदमी’’ अर्थात राजनीती, भ्रष्टाचार, गरीबी और घोटालों से दबा कुचला वह जनमानुष जिसकी सुध लेने की सुध किसी को नहीं| वह दिन प्रति दिन और गरीब होता जा रहा है, असहाय होता जा रहा है, भ्रष्टाचार और घोटालों ने जिसका जीवन नरक से भी बत्तर कर दिया है|
लोग कह रहे है के हम मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर रहे हैं| अगर धर्म निरपेक्ष होना किसी का तुष्टिकरण है तो हाँ हम कर रहे हैं तुष्टिकरण| असल में धर्मनिरपेक्षता का ठेका तो इस देश में केवल उन राजनितिक दलों ने ले रखा है जिन्होंने १९८४ में सिख दंगे कराये या उन्होंने जिन्होंने बाबरी मस्जिद को धर्म के नाम पर ध्वस्त कर दिया और २००० मे गोधरा कांड करा कर अपनी धर्मनिरपेक्षता का उदाहरण पूरे भारतवर्ष में प्रस्तुत किया| धर्मनिरपेक्षता का रोना रोने वाले बाकि धर्मनिरपेक्ष राजनितिक दलों की धर्मनिरपेक्षता उस दिन सामने आ जाती है जिस दिन वह इन दोनों धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को समर्थन देती हैं|
ऐसा नहीं है के हम इन्हें उत्तर नहीं दे सकते परन्तु हमेशा बुजुर्गों ने ये ही सिखाया है के “अंधे के आगे रोना, और अपने दीदे खोना”

वो दो कहें तो चार कहने का हक़ रखते हैं...
ख़ुदा ने दी भी है फ़ितरत हमको...
दबे से रहते हैं तालीम है बुजुर्गों की...
वरना सिखलाते बात करने का लहज़ा तुमको...

पी.एस.